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WhatsApp Username Feature: Privacy या Cyber Fraud का नया हथियार? Meta और भारत सरकार के बीच छिड़ी जंग

By WaveINO Newsroom Jul 13, 2026
WhatsApp Username Feature: Privacy या Cyber Fraud का नया हथियार? Meta और भारत सरकार के बीच छिड़ी जंग

व्हाट्सएप (WhatsApp) अपने यूजर्स के लिए अब तक का सबसे बड़ा प्राइवेसी अपडेट WhatsApp Username Feature लाने की तैयारी में है। इस फीचर के तहत यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर शेयर किए सिर्फ एक यूनिक यूजरनेम के जरिए दूसरों से चैट कर सकेंगे। लेकिन भारत में इस फीचर के लॉन्च होने से पहले ही केंद्र सरकार और टेक दिग्गज मेटा (Meta) के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए मेटा को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद मेटा ने फिलहाल भारत में इस फीचर के रोलआउट पर रोक लगा दी है।

सरकार को किस बात का है डर?

भारत सरकार की सबसे बड़ी चिंता देश में तेजी से बढ़ते सायबर अपराध, विशेष रूप से 'डिजिटल अरेस्ट', फिशिंग और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) हैं।

सरकार का मानना है कि मोबाइल नंबर छिप जाने से सायबर अपराधियों को एक नया कवर मिल जाएगा।

  • पहचान की चोरी (Impersonation): जालसाज किसी सरकारी अधिकारी, मशहूर हस्ती या बैंक के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को आसानी से धोखा दे सकते हैं।

  • ट्रैकिंग में मुश्किल: सुरक्षा एजेंसियों के लिए फोन नंबर के बिना किसी फ्रॉड अकाउंट के पीछे छिपे असली अपराधी तक पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

मंत्रालय ने साफ किया है कि व्हाट्सएप भारत में एक 'महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ' (Significant Social Media Intermediary) है, इसलिए उसे आईटी नियमों के तहत कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

मेटा (Meta) का क्या है पक्ष?

इस विवाद पर मेटा ने सरकार को अपना लिखित जवाब सौंप दिया है। कंपनी का तर्क है कि WhatsApp Username Feature का मकसद यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करना है, न कि कानून से बचना। मेटा ने सरकार को भरोसा दिलाने के लिए कई सुरक्षा उपायों (Safeguards) का जिक्र किया है:

  • नंबर अभी भी जरूरी: अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर अनिवार्य रहेगा, यूजरनेम सिर्फ नंबर को हाइड करने का एक वैकल्पिक (Optional) जरिया होगा।

  • हाई-प्रोफाइल नाम रिजर्व: सरकारी संस्थाओं, मशहूर हस्तियों और वेरिफाइड मेटा अकाउंट्स के नामों को पहले से सुरक्षित (Reserve) रखा जाएगा ताकि कोई उनका फेक यूजरनेम न बना सके।

  • एंटी-अब्यूज सिस्टम: अगर कोई अकाउंट बार-बार अलग-अलग यूजरनेम गेस करने की कोशिश करेगा या संदिग्ध गतिविधि दिखाएगा, तो उसे ब्लॉक कर दिया जाएगा।

टेक एक्सपर्ट्स की राय

इस फीचर को लेकर भारत के टेक स्टार्टअप्स और सायबर एक्सपर्ट्स भी बंटे हुए हैं। जहां कुछ लोग इसे प्राइवेसी के लिहाज से अच्छा मान रहे हैं, वहीं पेटीएम (Paytm) के संस्थापक विजय शेखर शर्मा और मोबिक्विक (Mobikwik) के बिपिन प्रीत सिंह जैसी बड़ी हस्तियों ने चिंता जताई है कि बिना कड़े वेरिफिकेशन के यह फीचर भारत में सायबर फ्रॉड का एक बड़ा जरिया बन सकता है।

आगे क्या होगा?

मेटा ने भारत सरकार को आश्वस्त किया है कि जब तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत और समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में इस फीचर को लाइव नहीं किया जाएगा। फिलहाल आईटी मंत्रालय मेटा के जवाब का बारीकी से विश्लेषण कर रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्राइवेसी और नेशनल सिक्योरिटी के इस बैलेंस में जीत किसकी होती है।